3 जुल॰ 2018

आम के औषधीय गुण व विभिन्न रोगों में आम के प्रयोग



आम फलों का राजा है ये तो हम सब जानते हैं लेकिन इस आम नाम वाले फल के गुण जानकार फिर आप इसे कभी दोबारा आम नहीं समझेंगे। तो आइए जानते हैं आम के औषधीय गुणों के बारे में-

१) पका हुआ मीठा आम शक्तिवर्धक, ठंडा और हृदय को बल प्रदान करने वाला होता है. इसके सेवन से त्वचा सुन्दर साफ़ व चमकदार होती है.

२) पका हुआ मीठा आम जहाँ पित्त को बढ़ाने वाला होता है तो वहीं कच्चा आम पित्त का नाश करने वाला होता है. कच्चे आम के सेवन से भूख बढ़ती है, इससे पाचनशक्ति में इजाफा होता है तथा कब्ज़ दूर होती है.

३) सूखी खांसी को मिटाने के लिए पके हुए आम को गर्म राख में भूनकर खाना चाहिए।

४) अनिद्रा अर्थात नींद ना आने की समस्या में दूध के साथ पके हुए आम का सेवन करना चाहिए।

५) आम के रस में सेंधा नमक और चीनी मिलाकर पीने से भूख बढ़ती है.

६) खून की कमी वाले रोगी को सुबह-शाम एक कप आम के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए।

७) सर दर्द, दिमाग की कमज़ोरी, आँखों के आगे अँधेरा छा जाने जैसी समस्या में २५० मिली पके हुए मीठे आम के रस में ५० मिली गाय का दूध और एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर कांसे की थाली में अच्छी तरह से फेंट लें और जब यह लस्सी जैसा गाढ़ा हो जाये तो इसका सेवन करें। इस प्रयोग से गुर्दे से जुड़ी समस्याओं से भी निजात मिलती है.

८) आम के पत्तों को उबालकर उस पानी से कुल्ला करने से मुंह की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलता है तथा मसूड़े मजबूत होते हैं. आम की गुठली के अंदर से निकलने वाली गिरी को पीसकर उसका मंजन बना कर रख लें. इस मंजन के सेवन से दांतों व मसूड़ों के कई रोगों में आराम मिलता है.

९) यदि बच्चों में मिट्टी खाने की आदत है तो उपरोक्त आम की गिरी के चूर्ण को पानी में मिलाकर बच्चे को २-३ बार नित्य पिलाना चाहिए। इससे पेट के कीड़े भी मर जाते हैं.

१०) आम की गिरी का रस नाक से खून आने की समस्या में बेहद कारगर है. मरीज़ की नाक में १-१ बून्द इस रस में टपकाने से उसे तुरंत आराम मिलता है.

११) मकड़ी के काट लेने पर अथवा शरीर पर मसल जाने पर कच्चे आम के अमचूर को पानी में मिलाकर लगाने से ज़हर का असर नष्ट हो जाता है.

१२) बवासीर एवं रक्तस्राव में आम की गुठली की गिरी का चूर्ण दिन में दो से तीन बार प्रयोग करें।

१३) शरीर के किसी अंग के जल जाने पर आम के पत्तों को जलाकर इसकी राख को अंग पर लगाने से जला हुआ अंग ठीक हो जाता है.


१४) मधुमेह के रोगियों को आम के पत्तों को छांव में सुखाकर उसका चूर्ण बना कर रख लेना चाहिए तथा नित्य इसका २-३ चम्मच सेवन करना चाहिए।

१५) शरीर के सभी अंगों को बल और पोषण करने के लिए आम की चाय का सेवन करना चाहिए। इस चाय को बनाने के लिए आम के १० पत्ते जो पेड़ पर लगे हुए ही पककर पीले हो गए हों उन्हें १ लीटर पानी में थोड़ी इलायची के दाने डालकर उबाल लें और इस पानी के आधा रह जाने पर इसमें दूध और शक्कर डालकर इसका सेवन करें। नित्य इसका सेवन करने से शरीर की कमज़ोरी दूर होती है और पाचन शक्ति में इजाफा होता है.

१६) टीबी के रोग में मरीज़ को एक कप आम के रस में ६० ग्राम शहद मिलाकर दें एवं दिन में तीन बार गाय के दूध का सेवन करायें। इस प्रयोग से १ महीने में ही टीबी के रोग में आराम मिलता है.

१७) एक वर्ष पुराने आम के अचार का तेल सर पर लगाने से बालों की लम्बाई बढ़ती है तथा शुरुआती गंजेपन में लाभ होता है.

१८) हिचकी आने पर आम के गिरे हुए पत्तों को जलाकर उसके धुंए के सेवन से हिचकी आना बंद हो जाती है.

१९) कब्ज़ के रोगी यदि पके हुए मीठे आम के साथ दूध का सेवन करें तो शौच खुलकर आती है.

२०) गठिया के रोग १०० ग्राम आम की गुठलियों को कुचलकर २५० मिली सरसों का तेल में मिलाकर पका लें. इस तेल की मालिश करने से रोगी का दर्द कम होकर रोग में आराम मिलता है.

20 जून 2018

आंखों की पलकों के फड़कने का प्राकृतिक उपचार

Home Remedies For Eye Twitching


कभी-कभी अपने आप हमारी आंखें फड़कने लगती हैं। वैसे तो यह अपने आप में कोई रोग नहीं। कभी-कभी ये होना आम बात है एवं इसके शकुन और अपशकुन का भी विचार किया जाता हैं परन्तु यदि यह सामान्य से अधिक लम्बे समय से आप इस समस्या से ग्रस्त हैं तो इन उपचारों द्वारा इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।

1) १० ग्राम गाय का घी और ४० मिली दूध लेकर उबालें और गुनगुना हो जाने पर इस दूध के साथ ५ ग्राम मिश्री एवं अश्वगंधा नागौरी के चूर्ण का सेवन करें। इस प्रकार से दिन में यदि यह प्रयोग सुबह और शाम को किया जाए तो आँखों का फड़कना बंद हो जाता है।

२) महारास्नादि काढ़े में सौंठ मिलाकर पीने से शरीर के किसी भी अंग के फड़कने की समस्या में आराम मिलता है।

३) त्रिफला के पानी से आँखों को सुबह शाम धोने से आँखों की फड़कने की समस्या में आराम मिलता है।

४) पथरचटा के पत्तों को पीसकर आँखों पर लेप करने से आँखों का फड़कना बंद हो जाता है। पथरचटा आँखों के अन्य रोगों में भी अतिलाभकारी है।

ये सभी उपाय अनुभूत और कारगर हैं। उपरोक्त उपायों के प्रयोग से आप घर पर ही आँखों के फड़कने की समस्या का उपचार कर सकते हैं। इसके अलावा पर्याप्त पानी पियें और कॉफ़ी का सेवन कम से कम करें। पर्याप्त मात्रा में नींद ना लेना भी इस आँखों के फड़कने का कारण बनता है इसलिए कम से कम ६-८ घंटे की नींद अवश्य लें।

6 जून 2018

5 काम जो फेसबुक पर कभी ना करें



फेसबुक अपने लोगों और दोस्तों से कनेक्ट रहने का अच्छा माध्यम है लेकिन इसके उपयोग में आपको कुछ सावधानियाँ भी बरतनी चाहिए क्योंकि आखिर हर तकनीकी के एक अच्छे पहलू के साथ उससे जुड़ा एक हानिकारक पहलू भी होता है जिसे ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है.

• अपनी फ्रेंडलिस्ट में जाकर देखें कि कितने लोगों को आप जानते हैं और उनपे आप भरोसा करते हैं. कई लोग अपने फोटो और पोस्ट पर ज़्यादा लाइक के लिए बहुत सारे दोस्तों को ऐड कर लेते हैं लेकिन इस क्रम में अनजाने लोगों को भी ऐड कर लिया जाता है जोकि आपकी सभी जानकारियों को देख सकता है. कई जानकारी हम सिर्फ अपने दोस्तों के साथ ही साझा करना पसंद करते हैं तो ऐसे में अजनबी को वो जानकारी दिखाने का औचित्य?

इसके अलावा हो सकता है कि किसी ने नकली आईडी बनाकर आपको request भेजी हो जिसे आप पसंद ना करते हों या फिर उसकी असली आईडी को आपने ब्लॉक कर रखा हो.

अजनबियों को ऐड करके आप किसी अपराध का शिकार भी बन सकते हैं. अपराधी भी जालसाजी, ब्लैकमेलिंग, लूट, चोरी आदि अपराधों के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं. आपके फेसबुक डाटा से आपकी दिनचर्या के बारे में पता करना आसान होता है इसलिए किसी भी अजनबी को अपनी फ्रेंडलिस्ट में जगह ना दें.

• यदि आपने अपना बर्थडे पब्लिक कर रखा है तो उसकी privacy setting दोस्तों तक ही सीमित रखें।

• अपने बच्चों की डीटेल्स जैसे उनका स्कूल और फोटोग्राफ्स आदि कभी भी फेसबुक पर ना डालें। यह उनके लिए कभी भी गंभीर खतरा बन सकता है.

• अपना फोन नंबर भी फेसबुक पर ऐड करना कोई ज़रूरी नहीं है. ना ही इसका कोई फायदा आपको होता है. पासवर्ड भूल जाने पर आप अपने ईमेल से अपना अकाउंट एक्सेस कर सकते हैं या फिर आप तीन ऐसे दोस्तों को सेटिंग में सेव कर सकते हैं जो पासवर्ड भूलने पर आपको लॉगिन करवा सकते हैं.

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पे जाएं https://www.facebook.com/help/119897751441086

• अपनी लोकेशन सर्विस को भी ऑफ करके रखें। नेविगेशन के लिए आपको कोई सोशल मीडिया ऍप्स यूज़ करने की कोई ज़रूरत नहीं है. आप गूगल मैप जैसी सर्विसेज का उपयोग कर सकते हैं.

• अपने ऑफिस के कर्मचारियों खासकर से अपने सीनियर कर्मचारियों को फेसबुक पर ऐड करना भी आपके कम्फर्ट को कम कर सकता है इसलिए उन्हें ऐड करने से पहले आप अपने और उनके व्यावसायिक और पर्सनल सम्बन्ध पर गौर कर लें.

• अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड कभी भी सेव करके ना रखें। इसके लिए आप वर्चुअल कार्ड generate कर सकते हैं. अपनी नेट बैंकिंग जाके में हमेशा अपने किसी भी transaction के लिए OTP अनिवार्य करके रखें। इससे आपके कार्ड से online किसी भी खरीद के लिए आपको पहले आपके मोबाइल पर SMS के ज़रिये एक OTP आएगा उसे डाले बगैर transaction पूरा नहीं होगा।


6 अप्रैल 2018

आँख आने का घरेलू रामबाण इलाज



Conjunctivitis या आँख आना एक ऐसा रोग है जीवन में एक न एक बार सबको होता है. इस रोग में मरीज़ को बहुत कष्ट होता है. आंखें लाल हो जाती हैं और आँखों से गाढ़ा चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता रहता है. रात को सोते समय आँखों में कीचड़ आने से से सुबह मरीज़ को आँख खोलने में बहुत परेशानी का सामना करना होता है.

यह एक संक्रामक रोग होता है इसलिए परिवार के किसी सदस्य को आँख आने पर उसके तौलिये-कपड़े इत्यादि किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग नहीं करना चाहिए एवं मरीज़ को धूप-धूल व धुंए इत्यादि से बचाकर रखना चाहिए।

घरेलू सामग्री से आँख आने का उपचार

जायफल

इस रोग में मरीज़ की आँखों में सुबह-शाम जायफल दूध में मिलाकर लगाने से यह रोग बहुत जल्द ठीक होता है.

शहद

एक चम्मच शहद में बारीक पिसा हुआ नमक मिलाकर लगाकर मरीज़ की आँखों में लगाने से लाभ होता है.

मुलैठी

मुलहठी को रात भर पानी में भिगोकर रखें एवं सुबह मरीज़ की आँखों को इस पानी को हल्का गुनगुना गर्म कर साफ़ रुई की मदद से धोएं तो बहुत जल्द ही मरीज़ को आराम मिलता है.

गुलाबजल

दिन में दो बार आँख आने पर रोगी की आँखों को गुलाबजल से साफ़ करने से रोग में आराम मिलता है और मरीज़ को होने वाले दर्द और चुभन में कमी आती है.

नीम

इस रोग में मरीज़ की आँखों को नीम के पानी से धोने से आँखों की सूजन व लाल होने में आराम मिलता है.

4 अप्रैल 2018

मोतियाबिंद का रामबाण इलाज


मोतियाबिंद आँखों का एक ऐसा रोग है जिसके कारण सबसे ज़्यादा लोग अपनी आँखों की रोशनी खो देते हैं। सामान्यतया यह रोग 60 की आयु पार कर लेने के बाद होता है लेकिन आजकल यह कम उम्र के लोगों में भी देखा जाने लगा है।

इस रोग के कारण आँखों का लेंस धीमे-धीमे अपनी पारदर्शिता खोने लगता है एवं जब लेंस के धुंधले हो जाने के कारण देखने में परेशानी होने लगती है तो इस स्थिति को मोतियाबिंद कहा जाता है।

अंगेज़ी दवा पद्धति में इसका उपचार शल्य क्रिया ही है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन हालांकि एक सरल और सुरक्षित ऑपरेशन है फिर भी आयुर्वेद में वर्णित दवाओं से भी मोतियाबिंद से छुटकारा पाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि घरेलू उपचार के द्वारा आप मोतियाबिंद से कैसे निजात पा सकते हैं-

उपचार

शहद

स्वस्थ आँखों में शहद की एक बून्द प्रतिदिन डालने से कभी मोतियाबिंद नहीं होता इसलिए इस रोग से बचने के लिए हमेशा आँखों में शहद डालने की आदत बनाएं।

जिनको मोतियाबिंद हो चुका है वे 50 मिली छोटी मधुमक्खी के शहद के साथ सफ़ेद प्याज़ का रस 10 मिली अदरक का रस 10 मिली और नीम्बू का रस 10 मिली मिलाकर इसे छानकर रख लें। इस मिश्रण की नित्य 2-2 बून्द आंखों में डालने से मोतियाबिंद नष्ट हो जाता है।

बादाम

रात को भिगोकर रखी गयीं 4-5 बादाम के साथ रोज़ सुबह 4-5 काली मिर्च थोड़ी सी मिश्री के साथ चबाकर खाने के बाद दूध के सेवन से मोतियाबिंद नष्ट हो जाता है।

स्वमूत्र

शुरुआती मोतियाबिंद में स्वमूत्र (स्वयं की पेशाब) का सेवन चमत्कारिक परिणाम देता है। स्वमूत्र को तुरंत उपयोग में नहीं लेना चाहिए। इसे भरकर 15-20 मिनट ढककर रख दें और ठंडा होने पर इससे आँखों को धोयें अथवा कुछ बून्द आँखों में डालें। इसके नित्य प्रयोग से 2-3 महीनों में ही मोतियाबिंद से छुटकारा मिल जाता है।

त्रिफला

10 ग्राम त्रिफला दिन में तीन बार एक छोटी चम्मच घी के साथ लेने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।

सेंधा नमक

1 ग्राम सेंधा नमक और 5 ग्राम सतगिलोय को पीसकर रख लें तथा रोज़ सुबह-शाम इस चूर्ण को शहद मिलाकर आँखों में लगाने से जल्द मोतियाबिंद ठीक होता है।

22 नव॰ 2017

कैसे जानें खाना खाते वक़्त कि पेट भर गया है?


एक औसत व्यक्ति का पेट अथवा आमाशय लगभग 4 लीटर का होता है एवं इतनी मात्रा में भोजन ले पाना नामुमकिन होता है तो फिर कैसे हमें पेट भरा जाने का एहसास होता है?

प्रतिक्रिया तंत्र

दरअसल पेट भर जाने अथवा तृप्ति के संकेत हमें हमारा मस्तिष्क पेट को भेजता है। जब भी हम भोजन करते हैं तो पेट में खिंचाव शुरू होने लगता है और पेट के स्ट्रेच रिसेप्टर हमारे मस्तिष्क को सिग्नल भेजने लगते हैं और मस्तिष्क उन सिग्नल का विश्लेषण करके एक समय के बाद हमें संकेत भेजने लगता है कि अब और अधिक मात्रा में भोजन की आवश्यकता नहीं है और हम तृप्ति की अनुभूति करने लगते हैं। इसके अलावा भोजन के प्रकार का भी तृप्ति से सम्बन्ध है।

समय

मस्तिष्क तक स्ट्रेच के सिग्नल पहुँचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है इसलिए पेट भरा जाने के एहसास का समय से भी सीधा सम्बन्ध है। वज़न कम करने के लिहाज़ से भी यह बात महत्वपूर्ण है। आपको अपना भोजन हमेशा धीरे-धीरे स्वाद लेकर और अच्छी तरह चबाकर करना चाहिए।

कैसे जानें खाना खाते वक़्त कि पेट भर गया है?

ज़रूरी नहीं है कि आप तब तक ही भोजन करते रहें जब तक कि आपको पूरी तरह से पेट भर जाने का एहसास होने लगे. दरअसल यह तो एक survival mechanism है जो हमें पाचन क्षमता से अधिक भोजन ना करने का संकेत देता है. यदि आप मस्तिष्क में गंध-स्वाद की बजाय भोजन का अनुभव पेट में करेंगे तो आपको अंदाज़ा लग जायेगा कि आवश्यकता के अनुरूप भोजन किया जा चुका है.

2 अप्रैल 2017

कहीं आप भी तो टीवी देखते हुए खाना नहीं खाते?


आजकल अकसर यह देखने में आता है कि लोग खाना खाते वक़्त टीवी ज़रूर देखते हैं। देखने में तो यह कोई बड़ी चिंता की बात नहीं लगती लेकिन हाल ही में हुए शोधों पर यकीन किया जाए तो खाते वक़्त टीवी देखना मोटापे और डायबिटीज़ होने के कई कारणों में से एक हो सकता है।

सामान्यतया खाना खाते समय हमारा अवचेतन मन खाने से जुड़े कई पहलुओं पर गौर करता है जैसे कि उसका स्वाद, तापमान, पोषण, भार एवं रसीलापन इत्यादि। हमारा मस्तिष्क सभी तरह की गणनाओं के बाद यह निष्कर्ष निकालता है कि कितना भोजन कर चुकने के बाद जिह्वा को सन्देश देना है कि आवश्यकतानुरूप भोजन कर लिया जा चुका है। सरल शब्दों में कहा जाए दिमाग हमें सन्देश देता है कि अब बस किया जाना चाहिए। लेकिन जब हम टीवी देखते हुए भोजन करते हैं तो हमारा अवचेतन भोजन की बजाय टीवी पर चल रहे कार्यक्रम के अनुरूप संचालित होने लगता है और वह अपना ध्यान भोजन से जुड़ी गणनाओं पर केंद्रित नहीं कर पाता। ऐसे में हमें पता नहीं चलता कि कितना भोजन किया जाना चाहिए और हम पूरी तरह से पेट भर जाने पर आवश्यकता से अधिक भोजन कर चुकते हैं।

इसके अलावा टीवी देखते समय हमारा बैठने का तरीका भी हमारे पाचन पर बुरा असर डालता है। सामान्यतया खाना खाते समय हमारी गर्दन कुछ नीचे की ओर झुकी हुई होती है परंतु टीवी देखते समय यह अपनी सामान्य अवस्था में नहीं रह पाती। अधिक समय तक ऐसा किये जाने पर हमारे पाचनतंत्र पर बुरा असर पड़ता है।

इसलिए भोजन हमेशा एकांत में मग्न होकर ही किया जाना चाहिए। टीवी,लैपटॉप और फ़ोन तो हम कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं बेहतर होगा कि खाना खाते समय हमारा सम्पूर्ण ध्यान भोजन पर ही रहे। यह सेहत के लिए तो महत्वपूर्ण है ही साथ यह उसके लिए भी सम्मानजनक है जिसने आपके लिए इतनी मेहनत से भोजन तैयार किया है।