प्राकृतिक उपचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
प्राकृतिक उपचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

3 जुल॰ 2018

आम के औषधीय गुण व विभिन्न रोगों में आम के प्रयोग



आम फलों का राजा है ये तो हम सब जानते हैं लेकिन इस आम नाम वाले फल के गुण जानकार फिर आप इसे कभी दोबारा आम नहीं समझेंगे। तो आइए जानते हैं आम के औषधीय गुणों के बारे में-

१) पका हुआ मीठा आम शक्तिवर्धक, ठंडा और हृदय को बल प्रदान करने वाला होता है. इसके सेवन से त्वचा सुन्दर साफ़ व चमकदार होती है.

२) पका हुआ मीठा आम जहाँ पित्त को बढ़ाने वाला होता है तो वहीं कच्चा आम पित्त का नाश करने वाला होता है. कच्चे आम के सेवन से भूख बढ़ती है, इससे पाचनशक्ति में इजाफा होता है तथा कब्ज़ दूर होती है.

३) सूखी खांसी को मिटाने के लिए पके हुए आम को गर्म राख में भूनकर खाना चाहिए।

४) अनिद्रा अर्थात नींद ना आने की समस्या में दूध के साथ पके हुए आम का सेवन करना चाहिए।

५) आम के रस में सेंधा नमक और चीनी मिलाकर पीने से भूख बढ़ती है.

६) खून की कमी वाले रोगी को सुबह-शाम एक कप आम के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए।

७) सर दर्द, दिमाग की कमज़ोरी, आँखों के आगे अँधेरा छा जाने जैसी समस्या में २५० मिली पके हुए मीठे आम के रस में ५० मिली गाय का दूध और एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर कांसे की थाली में अच्छी तरह से फेंट लें और जब यह लस्सी जैसा गाढ़ा हो जाये तो इसका सेवन करें। इस प्रयोग से गुर्दे से जुड़ी समस्याओं से भी निजात मिलती है.

८) आम के पत्तों को उबालकर उस पानी से कुल्ला करने से मुंह की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलता है तथा मसूड़े मजबूत होते हैं. आम की गुठली के अंदर से निकलने वाली गिरी को पीसकर उसका मंजन बना कर रख लें. इस मंजन के सेवन से दांतों व मसूड़ों के कई रोगों में आराम मिलता है.

९) यदि बच्चों में मिट्टी खाने की आदत है तो उपरोक्त आम की गिरी के चूर्ण को पानी में मिलाकर बच्चे को २-३ बार नित्य पिलाना चाहिए। इससे पेट के कीड़े भी मर जाते हैं.

१०) आम की गिरी का रस नाक से खून आने की समस्या में बेहद कारगर है. मरीज़ की नाक में १-१ बून्द इस रस में टपकाने से उसे तुरंत आराम मिलता है.

११) मकड़ी के काट लेने पर अथवा शरीर पर मसल जाने पर कच्चे आम के अमचूर को पानी में मिलाकर लगाने से ज़हर का असर नष्ट हो जाता है.

१२) बवासीर एवं रक्तस्राव में आम की गुठली की गिरी का चूर्ण दिन में दो से तीन बार प्रयोग करें।

१३) शरीर के किसी अंग के जल जाने पर आम के पत्तों को जलाकर इसकी राख को अंग पर लगाने से जला हुआ अंग ठीक हो जाता है.


१४) मधुमेह के रोगियों को आम के पत्तों को छांव में सुखाकर उसका चूर्ण बना कर रख लेना चाहिए तथा नित्य इसका २-३ चम्मच सेवन करना चाहिए।

१५) शरीर के सभी अंगों को बल और पोषण करने के लिए आम की चाय का सेवन करना चाहिए। इस चाय को बनाने के लिए आम के १० पत्ते जो पेड़ पर लगे हुए ही पककर पीले हो गए हों उन्हें १ लीटर पानी में थोड़ी इलायची के दाने डालकर उबाल लें और इस पानी के आधा रह जाने पर इसमें दूध और शक्कर डालकर इसका सेवन करें। नित्य इसका सेवन करने से शरीर की कमज़ोरी दूर होती है और पाचन शक्ति में इजाफा होता है.

१६) टीबी के रोग में मरीज़ को एक कप आम के रस में ६० ग्राम शहद मिलाकर दें एवं दिन में तीन बार गाय के दूध का सेवन करायें। इस प्रयोग से १ महीने में ही टीबी के रोग में आराम मिलता है.

१७) एक वर्ष पुराने आम के अचार का तेल सर पर लगाने से बालों की लम्बाई बढ़ती है तथा शुरुआती गंजेपन में लाभ होता है.

१८) हिचकी आने पर आम के गिरे हुए पत्तों को जलाकर उसके धुंए के सेवन से हिचकी आना बंद हो जाती है.

१९) कब्ज़ के रोगी यदि पके हुए मीठे आम के साथ दूध का सेवन करें तो शौच खुलकर आती है.

२०) गठिया के रोग १०० ग्राम आम की गुठलियों को कुचलकर २५० मिली सरसों का तेल में मिलाकर पका लें. इस तेल की मालिश करने से रोगी का दर्द कम होकर रोग में आराम मिलता है.

6 अप्रैल 2018

आँख आने का घरेलू रामबाण इलाज



Conjunctivitis या आँख आना एक ऐसा रोग है जीवन में एक न एक बार सबको होता है. इस रोग में मरीज़ को बहुत कष्ट होता है. आंखें लाल हो जाती हैं और आँखों से गाढ़ा चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता रहता है. रात को सोते समय आँखों में कीचड़ आने से से सुबह मरीज़ को आँख खोलने में बहुत परेशानी का सामना करना होता है.

यह एक संक्रामक रोग होता है इसलिए परिवार के किसी सदस्य को आँख आने पर उसके तौलिये-कपड़े इत्यादि किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग नहीं करना चाहिए एवं मरीज़ को धूप-धूल व धुंए इत्यादि से बचाकर रखना चाहिए।

घरेलू सामग्री से आँख आने का उपचार

जायफल

इस रोग में मरीज़ की आँखों में सुबह-शाम जायफल दूध में मिलाकर लगाने से यह रोग बहुत जल्द ठीक होता है.

शहद

एक चम्मच शहद में बारीक पिसा हुआ नमक मिलाकर लगाकर मरीज़ की आँखों में लगाने से लाभ होता है.

मुलैठी

मुलहठी को रात भर पानी में भिगोकर रखें एवं सुबह मरीज़ की आँखों को इस पानी को हल्का गुनगुना गर्म कर साफ़ रुई की मदद से धोएं तो बहुत जल्द ही मरीज़ को आराम मिलता है.

गुलाबजल

दिन में दो बार आँख आने पर रोगी की आँखों को गुलाबजल से साफ़ करने से रोग में आराम मिलता है और मरीज़ को होने वाले दर्द और चुभन में कमी आती है.

नीम

इस रोग में मरीज़ की आँखों को नीम के पानी से धोने से आँखों की सूजन व लाल होने में आराम मिलता है.

4 अप्रैल 2018

मोतियाबिंद का रामबाण इलाज


मोतियाबिंद आँखों का एक ऐसा रोग है जिसके कारण सबसे ज़्यादा लोग अपनी आँखों की रोशनी खो देते हैं। सामान्यतया यह रोग 60 की आयु पार कर लेने के बाद होता है लेकिन आजकल यह कम उम्र के लोगों में भी देखा जाने लगा है।

इस रोग के कारण आँखों का लेंस धीमे-धीमे अपनी पारदर्शिता खोने लगता है एवं जब लेंस के धुंधले हो जाने के कारण देखने में परेशानी होने लगती है तो इस स्थिति को मोतियाबिंद कहा जाता है।

अंगेज़ी दवा पद्धति में इसका उपचार शल्य क्रिया ही है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन हालांकि एक सरल और सुरक्षित ऑपरेशन है फिर भी आयुर्वेद में वर्णित दवाओं से भी मोतियाबिंद से छुटकारा पाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि घरेलू उपचार के द्वारा आप मोतियाबिंद से कैसे निजात पा सकते हैं-

उपचार

शहद

स्वस्थ आँखों में शहद की एक बून्द प्रतिदिन डालने से कभी मोतियाबिंद नहीं होता इसलिए इस रोग से बचने के लिए हमेशा आँखों में शहद डालने की आदत बनाएं।

जिनको मोतियाबिंद हो चुका है वे 50 मिली छोटी मधुमक्खी के शहद के साथ सफ़ेद प्याज़ का रस 10 मिली अदरक का रस 10 मिली और नीम्बू का रस 10 मिली मिलाकर इसे छानकर रख लें। इस मिश्रण की नित्य 2-2 बून्द आंखों में डालने से मोतियाबिंद नष्ट हो जाता है।

बादाम

रात को भिगोकर रखी गयीं 4-5 बादाम के साथ रोज़ सुबह 4-5 काली मिर्च थोड़ी सी मिश्री के साथ चबाकर खाने के बाद दूध के सेवन से मोतियाबिंद नष्ट हो जाता है।

स्वमूत्र

शुरुआती मोतियाबिंद में स्वमूत्र (स्वयं की पेशाब) का सेवन चमत्कारिक परिणाम देता है। स्वमूत्र को तुरंत उपयोग में नहीं लेना चाहिए। इसे भरकर 15-20 मिनट ढककर रख दें और ठंडा होने पर इससे आँखों को धोयें अथवा कुछ बून्द आँखों में डालें। इसके नित्य प्रयोग से 2-3 महीनों में ही मोतियाबिंद से छुटकारा मिल जाता है।

त्रिफला

10 ग्राम त्रिफला दिन में तीन बार एक छोटी चम्मच घी के साथ लेने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।

सेंधा नमक

1 ग्राम सेंधा नमक और 5 ग्राम सतगिलोय को पीसकर रख लें तथा रोज़ सुबह-शाम इस चूर्ण को शहद मिलाकर आँखों में लगाने से जल्द मोतियाबिंद ठीक होता है।

10 जन॰ 2017

बेकिंग सोडा से पाएं डैंड्रफ से छुटकारा


क्या आपने भी डैंड्रफ से परेशान होकर अपनी काली ड्रेस पहनना छोड़ दिया है? आजकल महिलाओं एवं पुरुषों में डैंड्रफ पाया जाना आम बात हो गई है। बाज़ार में तरह-तरह के दावे करने वाले जाने कितने शैम्पू हैं। कुछ बेकार तो कुछ असरदार। परंतु असरदार शैम्पू भी इस्तेमाल बंद करते साथ ही डैंड्रफ की समस्या फिर खड़ी हो उठती है।

घरेलू तरीकों से डैंड्रफ का उपचार पूर्ण रूप से संभव है। उपचार जानने से पहले आइए जानते हैं कि डैंड्रफ की समस्या आखिर पैदा कैसे होती है। डैंड्रफ एक फंगल इंफैक्शन है जो मलासेज़िया फंगस के कारण उत्पन्न होता है। जब यह फंगस सर की त्वचा के संपर्क में आता है तो उससे ओलिक एसिड बनने लगता है जिससे प्रभावित होकर त्वचा की एपिडर्मल लेयर नष्ट होने लगती है जिसके कारण त्वचा की मृत कोशिकाएं डैंड्रफ के कणों के रूप में झड़ने लगती हैं।

डैंड्रफ से लड़ने में बेकिंग सोडा प्रमाणित रूप से असरकारक है। यह बाकी अन्य एंटी डैंड्रफ उत्पादों की तुलना में कहीं अधिक किफायती और आसानी से मिलने वाला है। बेकिंग सोडे के नियमित इस्तेमाल से डैंड्रफ की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा तो मिलता ही है साथ ही यह आपके सर की त्वचा को और भी अधिक स्वस्थ बनाता है क्योंकि बेकिंग सोडा का सोख लेने का गुण तेल, धूल-मिट्टी एवं मृत कोशिकाओं को निकाल देता है। यह बालों को ड्राय किये बगैर शरीर से निकलने वाले अतिरिक्त तैलीय पदार्थ को भी हटा देता है। इसकी प्रकृति कुछ इस प्रकार की होती है कि यह स्किन को ड्राय किए बगैर ही त्वचा को साफ़ कर देता है और सबसे बड़ी बात इसका pH लेवल alkaline अर्थात क्षारीय होता है जो हमारी त्वचा के pH लेवल को भी संतुलित बनाए रखने में मददगार है।

डैंड्रफ के लिए बेकिंग सोडा का प्रयोग कैसे करें?

इसके लिए आप बेकिंग सोडा में नीम्बू का रस मिलाकर एक पतला पेस्ट तैयार कर लें और 5-10 मिनट तक हलके हाथों से अपनी scalp की मसाज करें। फिर 5-10 मिनट इसे ऐसा ही रहने देकर पानी से धो लें। हफ़्ते में दो बार ऐसा करने से जल्द ही आपको डैंड्रफ की समस्या से काफी निज़ात मिल जाएगी।

सावधानी

बेकिंग सोडा कम से कम मात्रा में ही प्रयोग किया जाना चहिए।
इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह से सर धो लें ताकि बेकिंग सोडा पूरी तरह से निकल जाए।

इस उपचार के साथ अपनी खाने-पीने की आदतों का भी खास ख्याल रखें। अच्छी जीवनशैली और उपयुक्त उपचार के द्वारा कुछ ही समय में इस समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है।


13 जुल॰ 2015

बारिश के मौसम में क्या करें क्या ना करें, जानिए आयुर्वेद के नज़रिए से


इस मौसम में आसमान बादलों से घिरा रहता है और हवा में नमी बनी रहती है। इस मौसम के दूषित जल और नमीयुक्त शीतल वायु से शरीर की अग्नि मंद पड़ जाती है। मंद हुई अग्नि से पाचनतंत्र पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही इस समय वायु भी दूषित हो जाती है और जल अम्ल्युक्त हो जाता है जिससे शरीर का पित्त कुपित हो जाता है। अग्नि मंद होने और वर्षा के पानी में पशुकीटआदि के मलमूत्र के स्पर्श से कफ़ भी कुपित हो जाता है। इस प्रकार से बारिश के मौसम में वात, पित्त और कफ़ तीनों ही के दोषों के कारण बीमारियों से घिरने की संभवना सबसे ज़्यादा होती है।

बारिश के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए अग्निवर्धक पदार्थों का सेवन करना चाहिए जैसे मूंग की दाल, मट्ठा, नीम्बू, अंजीर और खजूर इत्यादि। पानी उबालकर ही पीना चाहिए। रोज़ हरड़ के चूर्ण के साथ सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए। अधिक वर्षा के दिनों में लवणयुक्त खट्टे एवं स्निग्ध पदार्थों का सेवन करना चाहिए। तेल लगाकर स्नान करना चाहिए। पहनने के वस्त्रों को अकसर धूप में सुखाना चाहिए।

उदमन्थं दिवास्वप्नमवश्यायं नदीजलम्।
व्यायाममातपं चैव व्यवायं चात्र वर्जयेत्।।

अर्थात इस ऋतु में नदीतट का वास, नदी का जल, जलयुक्त सत्तू, दिन में सोना, व्यायाम, अधिक परिश्रम, धूप, रूखे पदार्थों का सेवन एवं स्त्री सहवास वर्जित हैं।

इस प्रकार कुछ सावधानियां बरतकर स्वस्थ रहकर आप वर्षा ऋतु का आनंद ले सकेंगे।

7 जुल॰ 2015

अतिगुणकारी हरड़ (Terminalia chebula)


हरीतकी सदा पथ्या मातेव हितकारिणी।
कदाचित कुप्यते माता नोदरस्था हरीतकी॥

हरीतकी (हरड़) सदा ही पथ्यरूपा (जिसका कभी परहेज ना करना पड़े) है, माता के समान हित करने वाली है। माता कभी-कभी कोप कर सकती है किन्तु सेवन की गयी हरड़ कभी कुपित नहीं होती, सदा हित ही करती है।

1. नमक के साथ हरड़ खाने से पेट सदा साफ रहता है। हरड़ के चूर्ण में एक चौथाई भाग ही नमक मिलाना चाहिए इससे अधिक में दस्तावर हो सकता है।

2. घी के साथ हरड़ का चूर्ण चाटने से कभी हृदय रोग नहीं होता।

3. सुबह शहद के साथ हरड़ का चूर्ण चाटने से शरीर का बल और शक्ति बढ़ती है।

4. मक्खन-मिस्री के साथ हरड़ के चूर्ण का सेवन करने से स्मरण शक्ति और बुद्धि बढ़ती है अतः विद्यार्थियों का इसका सेवन अवश्य करना चाहिए।

5. पंचगव्य के साथ हरड़ का चूर्ण सेवन करने से आयु बढ़ती है।

अतः हरड़ सदा ही हितकारी है, इसका सेवन नित्य करना चाहिए।

स्मरणशक्ति बढ़ाने वाला चमत्कारी कल्याणवलेह


कल्याणवलेह के २१ दिन तक नित्य सेवन से स्मरण शक्ति बहुत बढ़ जाती है। ऐसा व्यक्ति सुनकर ही बातों को याद कर लेता है। उसकी आवाज़ बादलों के समान गंभीर और कोयल के समान मधुर हो जाती है।

बनाने की विधि: हल्दी, बच, कूठ, पीपल, सोंठ, जीरा, अजमोद, मुलेठी और सेंधा नमक सब बराबर मात्रा में मिलाकर महीन पीस कर चूर्ण तैयार कर लें।

(सहरिद्रा वचा कुष्ठं पिप्पलीविश्वभेषजम्।
अजाजी चाजमोदा च यष्टीमधुकसैन्धवम्।।)

सेवन की विधि: ८ से १६ रत्ती (१ से २ ग्राम) तक आयु के अनुसार २१ दिनों तक नित्य प्रयोग करें।

6 जुल॰ 2015

सीताफल के सेहत से जुड़े 10 फायदे


बरसात के मौसम में पाया जाने वाला सीताफल आपकी सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी है। आइए जानते हैं उसके कुछ गुण और दोषों के बारे में-

1. जिनका वज़न कम है उनके लिए सीताफल बड़े काम का फल है। सीताफल में बहुत कैलोरी पाई जाती हैं एवं इसमें उपस्थित शर्करा मेटाबोलिस्म को बढाती है जिससे भूख खुलती है।

2. सीताफल विटामिन C से भरपूर होता है जो कि एक बहुत अच्छा एंटीऑक्सीडेंट होता है जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसे खाने से फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद मिलती है जो कैंसर जैसे रोगों से हमारी सुरक्षा करने में बहुत कारगर है।

3. सीताफल में विटामिन B कॉम्प्लेक्स पाया जाता है जो कि आपके मस्तिष्क के लिए बहुत ज़रूरी है। इससे तनाव और डिप्रेशन कम होता है।

4. सीताफल का छिलका दांतों और मसूड़ों की बिमारियों से लड़ने में हमारी मदद करता है।

5. खून की कमी को भी सीताफल पूरा करने में बहुत लाभकारी है। इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है। इसके प्रयोग से वमन (उल्टी), रक्त में थक्के जमना और गठिया जैसी बिमारियों में भी राहत मिलती है।

6. इसमें पाया जाने वाला रायबोफ्लेविन और विटामिन C के कारण यह आपकी आँखों के लिए लाभकारी है यह आपकी आँखों की ज्योति को बढ़ाता है।

7. सीताफल में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला मैग्नीशियम शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखता है और जोड़ों से एसिड बाहर निकालता है जो की गठिया जैसे हड्डियों के रोगों में बहुत लाभकारी है। इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है।

8. यह आपके हृदय के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है क्योंकि इसमें सोडियम और पोटेशियम आवश्यक अनुपात में होते हैं जो कि रक्तचाप को स्थिर रखने में सहायक हैं। यह शरीर में घातक कैलोस्ट्रॉल को कम कर लाभदायक कैलोस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम हृदय की मांसपेशियों के लिए बहुत ज़रूरी है जोकि हमें हृदयघात से बचाता है।

9. यह आंतों से टोक्सिन बाहर निकालता है जिससे आपका पाचनतंत्र भी स्वस्थ होता है। सीने में जलन, एसिडिटी, छालों और गैस जैसी तकलीफों में भी यह बहुत लाभकारी है। यह आपकी त्वचा के निखार के लिए भी बहुत उपयोगी है।

10. असमय प्रसव में सीताफल बेहद लाभकारी है। इसमें पर्याप्त मात्रा में कॉपर पाया जाता है जोकि शरीर को हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। एक गर्भवती स्त्री को भ्रूण के विकास के लिए प्रतिदिन 1000 मि.ग्रा. कॉपर की आवश्यकता होती है। इससे कम मात्रा में समय से पहले प्रसव और अविकसित भ्रूण की आशंका बनी रहती है इसलिए गर्भवती स्त्रियों को सीताफल का सेवन करते रहना चाहिए।

सीताफल के सम्बन्ध में कुछ चेतावनियाँ

1. सीताफल की प्रकृति बहुत ठंडी होती है इसलिए इसका सेवन निश्चित मात्रा में ही करना चाहिए

2. इसके बीज विषैले होते हैं अतः इनका सेवन कदापि ना करें।

3. डायबिटीज़ के मरीज़ों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें शर्करा बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है।

2 जुल॰ 2015

सेहत बनाए अंकुरित मूंग



प्रकृति में आसानी से उपलब्ध अंकुरित मूंग आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही गुणकारी है। अंकुरित मूंग में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है जिससे यह आपको फिट रखने में भी बहुत मदद करती है। आइए जानते हैं अंकुरित मूंग में कौन कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं - 

मूंग को अंकुरित करने की विधि

विटामिन K

हमारी बड़ी आंत में पाए जाने वाले बैक्टीरिया विटामिन K का निर्माण करते हैं लेकिन शरीर को आवश्यक मात्रा में नहीं। यह हमारी हड्डियों और हृदय में रक्त संचार प्रणाली के लिए बहुत आवश्यक है। अंकुरित मूंग में विटामिन K अच्छी मात्रा में उपलब्ध होता है।

विटामिन C

विटामिन C का एंटीऑक्सीडेंट गुण हमारी कोशिकाओं को फ्री रैडिकल से बचाता है जो कि कैंसर से लड़ने में बहुत मददगार है।

लौह तत्व (Iron)

अंकुरित मूंग में प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है। आयरन हमारे रक्त को शरीर में सुचारू रूप से ऑक्सीजन पहुँचाने में बेहद ज़रूरी है। इसके अलावा यह हमारी कोशिकाओं की वृद्धि में भी सहायक है जोकि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए ज़रूरी है।

फ़ॉलेट

विटामिन B का एक प्रकार फ़ॉलेट हमारे शरीर में डीएनए बनाने में अहम भूमिका अदा करता है। साथ ही यह लाल रक्त कण बनने में भी महत्वपूर्ण कारक है। ये प्रक्रियाएं सभी के लिए ज़रूरी हैं लेकिन बढ़ते बच्चों के विकास में तो ये एकदम ज़रूरी घटक हैं। इसलिए बच्चों को अंकुरित मूंग अवश्य देना चाहिए।

अंकुरित मूंग के सम्बन्ध में कुछ चेतावनी

अंकुरित मूंग में बहुत मात्रा में बैक्टीरिया पाए जाते हैं इसलिए बहुत छोटे नवजात शिशुओं और गर्भवती स्त्रियों को इसके सेवन से बचना चाहिए। बहुत बूढ़े लोग भी जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई हो वो भी इन बैक्टीरिया के दुष्प्रभाव से लड़ने में इतने सक्षम नहीं होते उन्हें भी इसे कच्ची खाने की सलाह नहीं दी जाती। ऐसे लोगों को अंकुरित मूंग पकाकर ही खानी चाहिए।

गाय के दूध के १० गुण

गाय का दूध बाकी सभी पशुओं से मिलने वाले दूध से बहुत अलग है। जानते हैं गाय के दूध के १० गुणों के बारे में -

स्वादु शीतं मृदु स्निग्धं बहलं श्लक्ष्ण पिच्छिलम्।
गुरु मन्दं प्रसन्नं च गव्यं दशगुणं पयः॥


गाय के दूध में ये दस गुण होते हैं - स्वादिष्ट, ठंडा, कोमल, चिकना, गाढ़ा, सौम्य लसदार, भारी और बाह्य प्रभाव को विलम्ब से ग्रहण करने वाला तथा मन को प्रसन्न करने वाला।

इतना ही नहीं प्रातर्दोह (सुबह के समय दुहा हुआ), संगव (दोपहर के समय दुहा हुआ) एवं सायंदोह (शाम के समय दुहा हुआ) दूध भी अलग-अलग प्रभाव रखता है। सुबह का दूध वीर्यवर्धक एवं अग्निदीपक, दोपहर का दूध बलकारक, बच्चों की वृद्धिकरक बूढ़ों में क्षयनाशक, मंदाग्नि नष्ट करने वाला, पित्त को हरने वाला एवं कफनाशक तथा शाम का दूध अनेक दोषों को नष्ट करने वाला होता है।

गाय का धारोष्ण (थनों से तुरंत निकला हुआ दूध) सभी असाध्य से भी असाध्य रोगों का नाश कर डालता है।

अतः गाय का दूध सदा सेवनीय है।

1 जुल॰ 2015

मोटापा दूर करें



साधारणतः मोटापे की पहचान है कि जितने इंच ऊंचाई हो उतने ही किलोग्राम वज़न होना चाहिए इससे कम होने पर पतला और अधिक होने पर मोटा कहा जायेगा।

बचपन में दौड़भाग करते रहने के कारण शरीर में फालतू चर्बी जमा नहीं हो पाती लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं शारीरिक श्रम के आभाव में शरीर पर चर्बी जमा होने लगती है। चर्बी के कारण रक्त संचार में बाधा उत्पन्न होती है एवं रक्तवाहिनियों में वसा के कारण कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है जिससे बी.पी. एवं हृदयरोग घर कर जाते हैं। रक्त संचार कम होने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है और तमाम बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है।

मोटापा दूर करने या इससे बचने के दो उपाय हैं, पहला है - भोजन सुधार और दूसरा है - प्रतिदिन शारीरिक श्रम। जिन पदार्थों में कार्बोहायड्रेट अधिक हो उन्हें त्याग दें जैसे तेल, घी, आलू, शकरकंद और चीनी। सुबह जल्दी उठकर एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीम्बू और 1 से 2 चम्मच शहद मिलकर नित्य पियें। इसके बाद शौच के लिए जाएं। फिर 3 से 4 किलोमीटर टहलें और हल्का व्यायाम करें।

नाश्ते में पराठें, ब्रैड, सीरियल या पोहे की जगह रसदार फल खाएं और मख्खन निकला मट्ठा पियें।

दोपहर और रात के भोजन में गेंहू की जगह जौं के आटे की एक-दो रोटी लें, उबली या कम घी में फ़्राय सब्ज़ी तथा सूप लें। डब्बाबंद तेल का प्रयोग कभी ना करें।

खाने के तुरंत बाद पानी पीने से भी मोटापा बढ़ता है क्यूंकि इससे जठराग्नि मंद होती है और शरीर खाने को ऊर्जा की बजाय चर्बी में बदल देता है।

क्रोध, चिंता और शोक ये स्वास्थ्य और सौंदर्य का नाश करते हैं अतः इनसे बचें।

30 जून 2015

खून की कमी के लिए



एक गिलास पानी में एक नीम्बू निचोड़ लें तत्पश्चात उसमे 25 ग्राम किशमिश डालकर रात भर गला रहने दें। सुबह उठकर भीगी हुई किशमिश खाते जाएं और यह पानी पीते जाएं। इस प्रयोग से शरीर में रक्त बढ़ता है।

जुखाम का प्राकृतिक इलाज



जुखाम होने पर एक साबुत नीम्बू (बिना कटा हुआ) को धोकर एक गिलास पानी में उबाल लें। उबल जाने पर उसे काटकर उसका रस इसी गरम पानी में निचोड़ लें। फिर इस पानी में 2 चम्मच शहद और 1 चम्मच अदरक का रस मिलाकर पियें। जुखाम ठीक हो जाएगा।


गंजापन दूर करने के दो नुस्खे



गंजापन आधुनिक जीवनशैली का एक गंभीर दुष्परिणाम है। कई युवा आज बाल झड़ने और गंजेपन की वजह से चिंतित रहते हैं। प्रस्तुत हैं 2 नुस्खे जिन्हें नियमित रूप से आजमाने से गए हुए बाल वापस आ जाते हैं -

1) नीम्बू के बीजों पर उसका सारा रस निचोड़ कर पीसकर गंजेपन से प्रभावित जगह पर लेप करें। 4-5 महीने लगातार लगाने पर बाल उग आते हैं।

2) तीन चम्मच चने के बेसन में एक नीम्बू का रस और थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा सा घोल बना लें। उसे सर पर लगाकर सूखने दें। सूखने के बाद धो लें।  उसके पश्चात समान मात्रा में नारियल का तेल और नीम्बू का मिलकर सर में लगाएं। बाल आ जाएंगे।

नियमित रूप से प्रयोग करें।

बुढ़ापा दूर रखने वाला संजीवनी पेय



प्रकृति के नियमानुसार बुढ़ापा आना तो निश्चित हैं पर उचित आहार-विहार और स्वास्थ्यरक्षक नियमों का पालन करके इसे यथासंभव दूर रखा जा सकता है। इस दिशा में एक सफल सिध्द अनुभूत प्रयोग यहां प्रस्तुत किया जा रहा है- 

शरीरशास्त्री वैज्ञानिकों का मानना है कि जब तक शरीर के कोषाणुओं (Cells) का पुनर्निर्माण ठीक-ठाक होता रहेगा, तब तक बुढ़ापा दूर रहेगा और शरीर युवा बना रहेगा। जब इस प्रक्रिय में विघ्न पड़ता है और कोषाणुओं के पुनर्निर्माण की गति मंद होने लगती है, तब शरीर बूढ़ा होने लगता है।

इस वैज्ञानिक विश्लेषण से एक निष्कर्ष यह निकला कि यदि विटामिन ई, विटामिन सी और कोलीन ये तीन तत्व पर्याप्त मात्रा में प्रतिदिन शरीर को आहार के माध्यम से मिलते रहें तो शरीर के कोषाणुओं का पुनर्निर्माण बदस्तूर ठीक से होता रहेगा और जब तक यह प्रक्रिया ठीक-ठीक चलती रहेगी, तब तक बुढ़ापा दूर रहेगा। बुढ़ापा आयेगा जरूर पर देर से आयेगा। इस निष्कर्ष पर विचार करके पूना के श्री श्रीधर अमृत भालेराव ने यह निश्चिय किया कि इन तीनों तत्वों को दवाओं के माध्यम से प्राप्त करने की अपेक्षा प्राकृतिक ढंग से, आहार द्वारा प्राप्त करना अधिक उत्तम और गुणकारी रहेगा। लिहाजा काफी खोजबीन और परिश्रम करके व इस नतीजे पर पहुंचे कि विटामिन ई अंकुरित गेहूं से, विटामिन सी नींबू, शहद और आंवले से एवं कोलीन मेथी दाने से प्राप्त किया जा सकता है। इन तीनों पदार्थों का सेवन करने के लिये उन्होंने यह फार्मूला बनाया-


40 ग्राम यानी 4 चम्मच [बड़े] गेहू और 10 ग्राम मेथीदाना- दोनों को 4-5 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि इन पर यदि कीटनाशक दवाओं का छिड़काव का प्रभाव हो तो दूर हो जाये। धोने के बाद आधा गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे तक रखें। चौबीस घंटे बाद पानी से निकालकर एक गीले तथा मोटे कपड़े में रखकर बांध दें और चौबीस घंटे तक हवा में लटका कर रखें। गिलास का पानी फेंकें नहीं, इस पानी में आधा नींबू निचोड़कर दो ग्राम सोंठ का चूर्ण डाल दें। इसमें 2 चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट पी लें। यह पेय बहुत शक्तिवर्धन, पाचक और स्फूर्तिदायक है, इसीलिये इसका नाम श्रीभालेराव ने संजीवनी पेय रखा है। चौबीस घंटे पूरे होने पर हवा में लटके कपड़े को उतारकर खोलें और गेहूं तथा मेथीदाना एक प्लेट में रखकर इस पर पिसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरक दें। गेहूं और मेथीदाना अंकुरित हो चुका होगा। इसे खूब चबा-चबाकर प्रात: खायें। यदि इसे मीठा करना चाहें तो काली मिर्च और नमक न डालकर गुड़ मसलकर डाल दें, शक्कर न डालें। यह मात्रा एक व्यक्ति के लिये हैं।

इस फार्मूले का सेवन करने से तीन तत्व तो शरीर को प्राप्त होते ही हैं, साथ ही एनजाइम्स, लाइसिन, आइसोल्यूसिन, मेथोनाइन आदि स्वास्थ्यवर्धक पौष्टिक तत्व भी प्राप्त होते हैं। यह फार्मूला सस्ता भी है और बनाने में सरल भी इसमें गजब की शक्ति है, यह स्फूर्ति और पुष्टि देने वाला है। इस प्रयोग को प्रौढ़ ही नहीं, वृध्द स्त्री पुरुष भी कर सकते हैं। यदि दांत न हों या कमजोर हों तो वे अंकुरित अन्न चबा नहीं सकते, ऐसी स्थिति में निम्नलिखित फार्मूले का सेवन करना चाहिए-

प्रात:काल एक कटोरी गेहूं और तीन चम्मच मेथीदाना अच्छी तरह धो-साफ कर चार कप पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। दूसरे दिन सुबह इसका एक कप पानी लेकर नींबू तथा शहद डालकर पी लें। शेष तीन कप पानी निकाल कर फ्रिज में रख दें। यदि फ्रिज न हो तो पानी गिलास में डालकर गिलास पर गीला कपड़ा लपेट दें और गिलास ठंडे पानी में रख दें और ढंक दें, ताकि पानी शाम तक खराब न हो। इस पानी को शाम तक एक कप पीकर समाप्त कर दें। गेहूं और मेथीदाने को फेंकें नहीं बल्कि फिर से 4 कप पानी में डालकर रख दें। दूसरे दिन सुबह 1 कप पानी और शेष दिन भर में पी लें। अब नया गेहूं तथा मेथीदाना लें और सुबह पानी में डालकर रख दें। दो दिन तक भिगोये हुए गेहूं और मेथी दाने को सुखा लें और पिसाने के रखे गये गेहूं में मिला दें। इस तरह बिना दांत वाले भी इस नुस्खे का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।

सौजन्य: कल्याण, आरोग्य अंक 2001, पृष्ठ संख्या 358

हार्ट अटैक आने पर तुरंत करें यह प्रयोग, बच सकती है जान



हार्ट अटैक या हृदयाघात हल्के में लेने वाली बात नहीं है। यदि आपके आसपास कोई हृदयरोगी है तो यह जानकारी अटैक आने पर उसकी जान बचा सकती है।

बीमारियों से होने वाली मौतों में सबसे ज़्यादा मौतें हृदयरोगों के कारण होती हैं। अमरीकी हर्बलिस्ट (वनस्पति शास्त्री) डॉ. क्रिस्टोफर दावा करते हैं कि उनके 35 वर्षों के अनुभव में उनका एक भी मरीज़ हृदयाघात से नहीं मरा। इसका श्रेय वे लाल मिर्च (Ceyenne Pepper) को देते हैं।

हार्ट अटैक रोकने के लिए मरीज़ को लाल मिर्च की चाय पिलाने से उसकी जान बचाई जा सकती है। इसके लिए एक कप पानी में एक टेबलस्पून लाल मिर्च मिला लें। फिर इस मिश्रण की 5 से 10 बूँद मरीज़ को पिला दें। यदि स्थिति में सुधार ना हो तो 5 मिनट के बाद दोबारा 5 से 10 बूँद पिलाएं।


लाल मिर्च में ऐसा क्या होता है?

दरअसल लाल मिर्च हृदय गति को बढ़ा देती है जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में रक्त संचार में आसानी होती है। इससे अंगों के काम ना करने के कारण होने वाली मौत से बचा जा सकता है।

इस प्रयोग को सिर्फ प्राथमिक उपचार ही समझें। हार्ट अटैक आने होने की परिस्थिति में तुरंत डॉक्टर को बुलाएं। लेकिन ऐसा करने से उतने समय तक मरीज को बचाया रखा जा सकता है।

डॉ. क्रिस्टोफर की वेबसाइट की लिंक यहाँ उपलब्ध है - www.christopherwebsites.com

28 जून 2015

बेमतलब है इस तरह से लहसुन खाना (महत्वपूर्ण जानकारी)


Image Credit: Getty Images


विटामिन C के विपरीत, लहसुन में पाया जाने वाला कैंसर से लड़ने में सक्षम एन्ज़ाइम एलिसिन (allicin) सिर्फ तभी सक्रिय हो पाता है जब वह हवा से प्रतिक्रिया करे। इसलिए लहसुन छीलने के बाद उसे थोड़ा काटकर कम से कम 10 मिनट तक हवा में रखने के बाद ही इस्तेमाल में लें।

स्रोत: Sara Haas, consultant & Dietitian, Academy of Nutrition and Dietetics, Cleveland, Ohio.

25 जून 2015

जानिए सेहत से जुड़े शहद के छः फायदे

आजकल शकर के बारे में इतना कुछ कहा सुना जा रहा है कि लोग अक्सर ऐसा समझने लगते हैं कि कुछ भी मीठा खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है। जबकि प्रकृति ने हमें ऐसे कई उपहार दे कर रखे हैं जिनमें प्राकृतिक रूप से शकर मौजूद रहती है। जैसे कि फल और शहद। आइए शहद के छः फायदों के बारे में जानते हैं।

1. एक बेहतरीन रोग प्रतिरोधक

शहद की कई खूबियों में से एक यह है कि इसमें विटामिन, खनिज और ऐसे कई एन्जाइम्स होते हैं जो हमारे शरीर को घातक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते  हैं और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यदि आप शहद का नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं तो यह आपको सर्दी जुखाम से जुड़े लक्षणों जैसे खांसी, गले की खराश और नाक बंद में भी राहत पहुंचाता है। यदि आप अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो प्रतिदिन 1 से 2 चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर पियें। साथ ही और अच्छे परिणामों के लिए आप इसमें कुछ बूँद नीम्बू का रस और थोड़ी सी दालचीनी भी मिला सकते हैं।

2. मोटापा करे कम

सुबह खाली पेट नीम्बू और शहद के साथ गरम पानी पीने से शरीर डिटॉक्सिफाय होता है। ऐसा रोज़ करने से लीवर साफ़ होता है एवं उससे सारे टॉक्सिन (ज़हरीले तत्व)  बाहर निकल जाते है। साथ ही शरीर से वसा या फैट भी निकल जाता है। ना सिर्फ आप ऐसा सुबह कर सकते हैं बल्कि रात को सोते समय भी नीम्बू शहद का पानी पीना उतना ही सेहतमंद है।

3. हृदय रोगों से बचाव

दालचीनी के साथ शहद का प्रयोग हृदय की रक्तवाहिकाओं और नसों को पुनर्जीवित करता है। यह उनकी सेहत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। इस प्रयोग से कॉलेस्ट्रोल में भी 10% तक की कमी देखी गई है। नियमित रूप से ऐसा प्रयोग करने से हार्ट अटैक की सम्भावना काफी कम हो जाती है। इन फायदों के लिए गर्म पानी में 1 से 2 चम्मच शहद के साथ 1/3 चम्मच दालचीनी के साथ दिन में एक बार प्रयोग करें।

4. अपच से दे राहत

बदहज़मी से पीड़ित लोगों के लिए भी शहद बहुत कारगर है। शहद का एंटीसैप्टिक गुण आमाशय में एसिड की मात्रा पर लगाता है। शहद गैस को भी निष्प्रभावित करता है जो कि उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जिन्हें कभी कभी अधिक खाने की वजह से गैस की शिकायत रहती है। किसी शादी या पार्टी में जाने से पहले जब अधिक खाने की सम्भावना हो तो अपच से बचने के लिए पहले ही 1 या 2 चम्मच शहद का इस्तेमाल कर लें पर यदि आपने अधिक खा ही लिया हो तो उसके बाद गर्म पानी में थोड़ा शहद और नीम्बू का रस बदहज़मी में भी फायदा पहुंचाता है।

5. थकान रखे दूर

शहद में पायी जाने वाली प्राकृतिक शर्करा में कैलोरीज़ और ऊर्जा होती है। अधिक थकान होने पर कुछ मीठा खाने के लिए होने वाली चाहत भी शहद खा लेने से पूरी हो जाती है।  इसे खाना संतुष्टि का एहसास करता है। थकान होने पर कॉफी या चॉकलेट खाने की बजाय शहद हमेशा ही एक बेहतर विकल्प है।

6. त्वचा का भी रखे ख्याल

शहद का एंटीफंगल और एंटी माइक्रोबियल (फफूंद और सूक्ष्मजीव) गुण इसे एक उत्कृष्ट स्किन केयर प्रोडक्ट बनाता  है। किसी भी दाग या धब्बे पर सीधे शहद का लेप करें और रात भर उसे लगा रहने दें। सुबह उठते ही इसे धो लें। ऐसा रोज़ करने पर आपको त्वचा की बेहतर सेहत नज़र साफ़ आने लगेगी। चेहरे पर शहद का मास्क लगाने से त्वचा में निखार आता है। सोरायसिस में हालाँकि यह इतना कारगर नहीं है पर इसके प्रयोग से बड़ी राहत मिलती है।

आपके पास भी शहद से जुड़ी कुछ जानकारी है तो नीचे कमेंट करें।

बिना एक्सरसाइज़ करें सिर्फ एक माह में मोटापा कम



जी हाँ आप सिर्फ एक महीने में ही अपना मोटापा कम कर सकते हैं। ना तो इसके लिए आपको किसी जिम में पसीना बहाना है और ना ही किसी प्रकार की कोई कसरत करनी है। लेकिन आपको पूरे एक महीने तक अपने आहार पर संयम रखना है। क्यूंकि सिर्फ एक महीने में वज़न कम करना कोई आसान बात नहीं है। लेकिन यदि आप दृढ़निश्चयी हैं तो आप इसमें ज़रूर सफल होंगे। यदि आप तैयार हैं तो नीचे दिए गए नियमों का पालन करें -

1) रात को सोते समय 1 गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गला कर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को इतना उबालें कि वह आधा रह जाए। फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर पी लें।

2) रोज़ कम से कम 10 गिलास पानी पिएं। फ्रिज में रखा पानी बिलकुल भी ना पिएं। दिन भर में 4 से 5 गिलास गुनगुना (Lukewarm) पानी भी पियें।

3) अब बात करते हैं आहार की और यही सबसे बड़ी चुनौती भी है क्यूंकि अगले एक महीने तक आपको ऐसी कोई भी चीज़ नहीं खाना है जिसका रंग सफ़ेद हो। जिसमें आटा, नमक, शक्कर और दूध या दूध से बनी सभी चीज़ें शामिल हैं।

4) आप सभी तरह की दालें खा सकते हैं। विशेषकर मूंग की दाल आपका वज़न कम करने में काफी मदद करेगी। दाल को उबालकर उसे आप सिर्फ आधे चम्मच मूंगफली या तिल के तेल से फ़्राय कर लें। सोयाबीन का तेल इस अवधि में बिलकुल इस्तेमाल ना करें। दाल में आप चाहें तो थोड़ा सा काला नमक और मसाले भी डाल सकते हैं।

5) आप सभी तरह के फल और सब्ज़ियाँ (कच्ची या उबालकर) खा सकते हैं। लेकिन फलों में केले का प्रयोग ना करें। सबसे अच्छा फल जो इस समय आपका सबसे अच्छा साथ निभा सकता है अनानास क्यूंकि यह कई पाचक एन्ज़ाएम्स से युक्त होता है और यह काफी स्वादिष्ट और संतुष्टि देता है। भूलकर भी आलू का सेवन ना करें। ज्यूस की जगह सीधे फल ही खाएं क्यूंकि इससे आपके शरीर में भरपूर फायबर उपस्थित रहेगा।

यदि आप इन पांच नियमों का कड़ाई से पालन कर लें तो सिर्फ एक महीने में ही बिना किसी एक्सरसाइज़ के आप अपना वज़न कम कर सकते हैं। मगर ध्यान रहे इसके लिए आपको पूरी तरह से स्वस्थ होना ज़रूरी है। बढ़ती उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, ह्रदय रोगी एवं ऐसे मरीज़ जिनका शुगर लेवल कम रहता हो वो ऐसा न करें। आपके विचार और अनुभव हमें नीचे कमेंट करके अवश्य बताएं।

24 जून 2015

मच्छरों को दूर भगाता है गेंदे का फूल



आए दिन शहरों में कूड़ा-करकट और गंदगी बढ़ती ही चली जा रही है जिसके चलते मच्छरों का प्रकोप एक आम बात हो गई है। समाधान के रूप में हम विषैले रसायनों वाले अगरबत्ती और रिपलेंट्स आदि का प्रयोग करने में अब ज़रा भी नहीं हिचकिचाते जबकि ये स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं, खासकर बच्चों और बूढ़ों के लिए।

ऐसे में गेंदे का फूल एक बहुत ही कारगर उपाय है क्यूंकि गेंदे में Pyrethrum नाम का रसायन पाया जाता है जिसकी सुगंध मच्छरों और कई कीड़ों को दूर भगाती है। घर के आसपास गेंदे के फूल कुछ इस तरह लगाएँ कि उनकी तेज़ महक आपके बैडरूम में आती रहे। इस तरह से गेंदे के फूल के प्रयोग से बिना हानिकारक रसायनों के ही मच्छरों से निज़ात पाई जा सकती है।